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गोल्डन टेम्पल.....

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दिल्ली से अमृतसर के लिए बस अड्डे से आसानी से बसें उपलब्ध हैं। रेलमार्ग से जाना चाहें तो दिल्ली से बहुत सी ट्रेन हैं जो लगभग 9 घंटे में अमृतसर पहुंचा देती हैं। अमृतसर वायुमार्ग द्वारा भी सभी राज्यों से जुड़ा है। यहां के राजा सांसी हवाई अड्डे से सभी राज्यों के लिए नियमित फ्लाइट्स हैं। यूं तो अमृतसर का नाम लेते ही गोल्डन टेंपल याद आता है पर अमृतसर में इस पावन गुरुद्वारे के साथ-साथ देखने के लिए और भी बहुत कुछ है  अमृतसर पंजाब का एक सीमांत शहर है और भारत के सभी शहरों से भली-भांति जुड़ा है। सड़क मार्ग द्वारा पानीपत, लुधियाना, जालंधर होते हुए करीब 11 घंटे की ड्राइव करके अमृतसर पहुंचा जा सकता है।चूंकि अमृतसर एक सीमांत शहर है और पाकिस्तान के साथ बॉर्डर शेयर करता है इसलिए लाहौर यहां से सिर्फ 40 किलोमीटर रह जाता है।  

बाघा बार्डर अमृतसर से 30 किलोमीटर दूर अटारी गांव में स्थित एक चैक पोस्ट है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा पाकिस्तान जाया जा सकता है। यहां हर रोज शाम ढले बीएसएफ के जवानों की परेड होती है और दोनों देशों के दरवाजें खोले जाते हैं और पूरे सैनिक सम्मान के साथ दोनों देशों का राष्ट्रीय झंडा उतारा जाता है। लगभग 1 घंटे की इस परेड सेरमनी को देखना एक यादगार अनुभव है। गोल्डन टेम्पल को हरमंदर साहेब भी कहा जाता है। यहां सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास ने एक पवित्र सरोवर का निर्माण किया जिसे अमृत सरोवर नाम दिया गया। इसके बाद उनके पुत्र और शिष्य अर्जुन देव ने इस सरोवर के बीच एक मंदिर बनवाया जिसमें सिखों के पवित्र ग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहेब' को रखा गया।गोल्डन टेम्पल से 5 मिनट की दूरी पर स्थित जलियांवाला बाग अंगे्रजों की निर्ममता की कहानी कहता है। यह उस समय की याद दिलाता है जब जरनल डायर ने बैसाखी के दिन यहां शांतिपूर्ण सभा कर रहे दो हजार निहत्थे और मासूम भारतीयों पर अधाधुंद गोलियां बरसा कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। अब इस बाग को एक खूबसूरत उद्यान का रूप दे दिया गया है पर उन गोलियों के निशान आज भी इस बाग की दीवारों पर मौजूद हैं। यहां वो पुराना कुआं भी है जिसमें डूबकर कई लोगों ने अपनी जान गवांई थी। बाग में दो संग्रहालय भी हैं जिनमें उस समय के अखबार, नोटिस व अन्य चीजें संभालकर रखी हुई हैं।