आध्यात्मिक कृषि मेला पर करोड़ो खर्चा -बलीराजा पार्टी

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07 से 09 मार्च 2018 तक शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट के मैदान में आयोजित तीन दिवसीय जैविक-आध्यात्मिक कृषि मेला का आज 09 मार्च को समापन हो गया। समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, कलेक्टर श्री डी व्ही सिंह, कृषि विभाग के अतिरिक्त संचालक श्री अहिरवार, जिला पंचायत की संचार एवं संकर्म समिति के सभापति श्री उमेश देशमुख, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष श्री राजकुमार रायजादा, उपाध्यक्ष श्री महेन्द्र पटले, श्री छगन हनवत, प्रगतीशील किसान श्री कुंवर बिसेन, श्री दीपक बिरनवार, श्री राकेश बनोटे, सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक कृषि श्री जे एल बिसेन, कृषि एवं अन्य विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में मेले में आये कृषक उपस्थित थे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि मंत्री श्री बिसेन ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि बालाघाट में पहली बार राज्य स्तरीय कृषि मेला का आयोजन किया गया है और इसे किसानों एवं क्षेत्र की जनता का अच्छा प्रतिसाद मिला है। इस मेले का बालाघाट ही नहीं मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ के किसानों ने भी लाभ उठाया और किसानों को अपने जैविक व अन्य उत्पाद बेचने के लिए एक अच्छा मंच मिला। तीन दिनों के इस मेले में 3 लाख से अधिक किसानों से इस मेले का लाभ उठाया। इस मेले में जैविक कृषि एवं आध्यात्म को एक साथ जोड़ने वाले आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी का किसानों को सानिध्य मिला है। यह मेला जिले के किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

कृषि मंत्री श्री बिसेन ने कहा कि देश में एक वक्त ऐसा भी था जब खाने लायक अनाज पैदा नहीं होता था और विदेशों से अनाज मंगाया जाता था। हरित क्रांति से देश से अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया। लेकिन रासायनिक खाद एवं उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से हमारे अनाज में जहर मिलने लगा है और पर्यावरण प्रदूषित होने लगा है। जहरीला अनाज खाने से केंसर जैसी बीमारियां बढ़ने लगी है। इससे बचने का एक ही रास्ता बचता है कि किसान जैविक खेती को अपनायें और जैविक अनाज के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाये। प्रदेश सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। कृषि मंत्री श्री बिसेन ने किसानों से कहा कि वे कृषि के साथ ही कम से कम एक गाय अवश्य पालें। अब तो ऐसी तकनीक आ गई है कि गाय से मादा बछड़ा ही पैदा होगा। गाय पालन से जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा।

कृषि मंत्री श्री बिसेन ने कहा कि वर्ष 2002-03 में प्रदेश में इतना भी गेहूं पैदा नहीं होता था कि राशन दुकानों में उसे सप्लाय किया जा सके। राशन दुकानों में आस्ट्रेलिया से मंगाया गया लाल गेहूं सप्लाय किया जा रहा था। लेकिन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में हालात तेजी से बदले है। मध्यप्रदेश में गेहूं का उत्पादन बढ़ कर 200 लाख मिट्रीक टन तक पहुंच गया है। गेहूं के उत्पादन के मामले में मध्यप्रदेश, पंजाब एवं हरियाणा को पीछे छोड़कर उत्तरप्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर आ गया है। गेहूं के अधिक अत्पादन के लिए मध्यप्रदेश को लगातार 5 बार कृषि कर्मण पुरूस्कार मिला है। यह सब प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण संभव हो सका है।

कृषि मंत्री श्री बिसेन ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों को धान एवं गेहूं के समर्थन मूल्य पर 200 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया है। जिन किसानों ने वर्ष 2017-18 में 15 जनवरी 2018 तक समर्थन मूल्य पर अपना धान बेचा है उन्हें 200 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। इसी प्रकार गत वर्ष जिन किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचा था, उन्हें भी 200 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। वर्ष 2018 में समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने वाले किसानों को 265 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। वर्ष 2017-18 में बालाघाट जिले में 03 लाख मिट्रीक टन एवं पूरे प्रदेश में 16 लाख 25 हजार मिट्रीक टन धान समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है। धान के समर्थन मूल्य पर प्रोत्साहन राशि के लिए बजट में 325 करोड़ रुपये एवं गत वर्ष समर्थन मूल्य पर खरीदे गये 67 लाख मिट्रीक टन गेहूं पर प्रोत्साहन राशि के लिए बजट में 1340 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों को समर्थन मूल्य पर यह प्रोत्साहन राशि आने वाले वर्षों में भी दी जायेगी।

कलेक्टर श्री डी व्ही सिंह ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि बालाघाट जिले में इतना बड़ा आयोजन पहली बार हुआ है। इस आयोजन में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने तैयारियों में कोई कसर बाकी नहीं रखी और पूरी जिम्मेदारी के साथ इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया है। तीन दिनों के इस आयोजन में बड़ी संख्या में किसानों एवं लोगों की भीड़ को व्यवस्थित रखना एक कठिन कार्य था। मेले के दौरान कहीं पर भी अव्यवस्था नहीं हुई। इस मेले में बालाघाट जिले के साथ ही दंतेवाड़ा, बस्तर जैसे दूर-दूर के स्थानों से किसान अपने जैविक उत्पाद लेकर आये थे। मेले में सभी जैविक उत्पाद बिक गये है और किसानों से अपने उत्पाद के लिए बड़े आर्डर भी प्राप्त किये है।

उप संचालक कृषि श्री राजेश त्रिपाठी ने अपने संबोधन में बताया कि बालाघाट में राज्य स्तरीय किसान मेले के आयोजन से बालाघाट जिले के किसानों को बहुत लाभ हुआ है। जैविक खेती के लिए जिले में तैयार किये गये स्वयं सहायता समूहों के किसानों को अपने जैविक उत्पाद बेचने के लिए एक बाजार मिला और इससे उनमें आत्म विश्वास का संचार हुआ है।

इस मेले में जैविक पद्धति से तैयार सुगंधित चावल, बासमती चावल, गाडरवारा की अरहर की दाल, उड़द, सरसों का तेल, अलसी का तेल, मशरूम, कोदो का चावल, कुटकी, शहद लोगों द्वारा बहुत पसंद किया गया और जमकर खरीदा भी गया। इस मेले में उन्नत कृषि यंत्री भी किसानों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहे।  समापन कार्यक्रम में जिले के प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया।

बलीराजा पार्टी प्रदेश महासचिव विकास खण्डेलकर जी ने आध्यात्मिक कृषि प्राचीन भारत में नहीं तो विश्व में भी नहीं हुवी यह किसानो को गुमराह करने की साजिश है ऐसा कहा.

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