जिग्नेश मेवानी की रैली में एडवोकेट प्रशांत भूषण कैसे ?

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भारतीय संविधान (अनुसूचित जाती) आदेश की क्रम संख्या 19 (सन १९५०) का परिच्छेद 3 के अनुसार, “अनुसूचित जाती” का दर्जा पाने के लिए उस व्यक्ति का धर्म हिन्दू होना आवश्यक है |पश्चात संविधान के अनुच्छेद 25 की स्पष्टीकरण संख्या 2 की भावना के अनुरूप उपरोक्त आदेश में, उचित संशोधन कर सन 1956 में सिख तथा सन 1990 में बौद्ध जोड़ा गया |इसके पश्चात “अनुसूचित जाती वर्ग के” व्यक्ति द्वारा ईसाई धर्म स्वीकार करने के बावजूद उसका अनुसूचित जाती का दर्जा कायम रहे और उसको अनुसूचित जाती वर्ग के लाभ पूर्ववत मिलते रहे इसके लिए “सेंटर फॉर पब्लिक इंटेरेस्ट लिटिगेशन” की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषणजी ने सुप्रीम कोर्ट में 22 मार्च 2004 को एक याचिका (याचिका संख्या 180 /2004) दायर की और उस में संविधान आदेश के परिच्छेद 3 को यह कहते हुए चुनौती दी गई की, “इस आदेश से मुसलमान और ईसाईयो पर अन्याय हो रहा है”| इसलिए अनुसूचित जाती वर्ग का होने के लिए धर्म की शर्त ही रद्द की जाये, एडवोकेट प्रशांत भूषणजी ने ऐसी मांग की | यह मामला आज भी सुप्रीम कोर्ट में प्रलंबित है |
साथियो, अनुसूचित जाती वर्ग का ईसाईकरण करने के लिए मिशनरियों ने इस देश में पुरजोर तरीके से अभियान चला रख्खा है | लेकिन उपरोक्त्त क़ानूनी बाधा के कारण ईसाई मिशनरियों को जैसी चाहिए वैसी सफलता अब तक नहीं मिल पा रही है |लेकिन भारतीय संविधान (अनुसूचित जनजाती) आदेश की क्रम संख्या 22 (सन १९५०) में अनुसूचित जनजाति का होने के लिए धर्म की शर्त नहीं रखी गई मतलब अनुसूचित जनजाति का होने के लिए व्यक्ति का धर्म कोई भी हो सकता है | इसी कारण, देश में अनुसूचित जनजाति वर्ग का विशेष कर उत्तर पूर्वी राज्यों में बढे पैमाने पर ईसाईकरण हुवा है और हो रहा है |
हिन्दू समाज की प्रस्थापित जातियों के अत्याचार से तंग आकर कुछ अनुसूचित जातियों के कुछ समूह इस्लाम अपनाने की बात करते है, लेकिन संविधान आदेश 19 के प्रावधान में हिन्दू, सिख, बौद्ध होने की शर्त को देखते हुए वे ऐसा नहीं कर पाते | इसलिए अनुसूचित जाती वर्ग के ईसाईकरण व इस्लामीकरण का रास्ता खुला करने के लिए एडवोकेट प्रशांत भूषणजी और उनकी संस्था सेंटर फॉर पब्लिक इंटेरेस्ट लिटिगेशन आज भी सुप्रीम कोर्ट में लड़ रही है | तब ऐसे एडवोकेट प्रशांत भूषण और दलितो के युवा नेता जिग्नेश मेवानी का एक साथ आना, क्या सन्देश दे कर जाता है ?क्या जिग्नेश मेवानी भी यही चाहते है की, अनुसूचित जाती समुदाय का ईसाईकरण या इस्लामीकरण हो ?ऐसे में बौद्ध धर्म का विस्तार कैसे होगा ? इसका भी जबाब जिग्नेश मेवानी के समर्थकोंने विशेषकर बौद्ध सर्थकोंने देना होगा की, वे भी अनुसूचित जाती वर्ग का पिछले दरवाजे से ईसाईकरण या इस्लामीकरण तो नहीं चाहते है ?
– अशोक मेंढे

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