जितनी नौकरियां लालूराज में दी गयी, उतनी 2005 से लेकर आज तक नहीं मिली

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लालूजी के शासन की कुछ सच्चाई भी जाने, जो मिडिया ने कभी उजागर नहीं की. सच्चाई पेश करनेवाले कोई पक्ष के नेता नहीं लेकिन एक अध्यापक और लेखक डॉ हरीनारायण ठाकुर है.
भ्रष्ट्राचार और लालू यादव:
कर्पूरी से लेकर लालू यादव के काल में लगी. कांग्रेस काल की घूस संस्कृति कर्पूरी काल में खत्म हो गयी थी. लालू काल में तो पुलिस-सिपाही तक थाने या रोड पर पैसे लेने से डरते थे. औरों की बात मैं नहीं करता, मैंने 14 नौकरियां की है, पर किसी भी नियुक्ति में न किसी ने घूस माँगा, न मैंने दिया. मेरी कोई पैरवी भी नहीं थी, फिर भी टॉपर लिस्ट में मेरा सेलेक्सन होता रहा.
व्याख्याता नियुक्ति के लिए लालू के समय NET की तरह BET परीक्षा का आयोजन हुआ, NET से भी कड़े सवाल पूछे गये. नेगेटिव मार्किंग थी. वहाँ भी मैं टॉप लिस्ट में रहा. बिहार में पहली बार 1300 व्याख्याताओं की एकमुश्त नियुक्ति हुई. मीडिया में शोर मचा कि व्यापक भ्रष्ट्राचार हुआ है, हाईकोर्ट में 12-12 केश हुए. तमाम चयनित लोगों के बायोडाटा हाईकोर्ट ने मंगवा लिया. पर एक भी नियुक्ति गलत नहीं पाई गयी. पटना हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी, पर आवेदकों को वहाँ भी मुंहकी खानी पड़ी. बिहार व्याख्याता संघ के विवि सचिव की हैसियत से मैंने केश को करीब से देखा और झेला था.

लालू राज को भ्रष्ट्राचार राज किसी ने नहीं कहा, केवल कानून-व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने व्यंग्य में ;जंगल राज’ कहा था, जो लालू के खिलाफ एक मुहावरा बन गया और इसका खूब राजनीतिक इश्तेमाल हुआ. सच्चाई तो यह थी कि सामन्ती ताकतों को पहली बार चुनौती लालू राज में ही मिली थी, जिससे घबराकर राज्य में इन ताकतों ने लालू को फेल करने के लिए माफिया और अपराध-तन्त्र को बढ़ावा दिया, निजी सेनाओं ने कई नर-संहार किये. साम्प्रदायिक ताकतों को रोकने के एवज में लालू पर चारा घोटाला की साजिश की गई. फिर वे उसी में उलझे रहे. हाँ, उनके इर्द-गिर्द के लोगों ने कुछ गलतियाँ की, जिसको बढ़ावा देकर विरोधियों ने लालू को सत्ता से बेदखल किया.

जो लोग कहते हैं ‘लालू ने विकास नहीं किया’, उन्हें जानना चाहिए कि क्लास one से लेकर फोर्थ ग्रेड तक पूरे वेतनमान पर बिहार में जितनी नौकरियां लालूराज में दी गयी, उतनी 2005 से लेकर आज तक नहीं मिली.आज गाँव-गाँव में जो पक्की सड़कें बन रही है, वह लालूराज की ईट-सोलिंग की ही बुनियाद है, ऐसी सोलिंग नहीं कि कोई उखाडकर ले जाये.”
– Pr. Harinarayan Thakur

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