लालूजी ने रांची की जेल से लिखा पत्र

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लालूजी ने रांची की जेल से लिखा पत्र सिर्फ बिहारवासियों के लिए नहीं, लेकिन पुरे भारत के भारतवासियों के लिए है…

‘मेरे प्रिय बिहार(भारत)वासियों ,
आप सबों के नाम ये पत्र लिख रहा हूँ और याद कर रहा हूँ अन्याय और ग़ैर बराबरी के खिलाफ अपने लम्बे सफ़र को, हासिल हुए मंजिलों को और ये भी सोच रहा हूँ कि अपने दलित पिछड़े और अत्यंत पिछड़े जनों के बाकी बचे अधिकारों की लड़ाई को.बचपन से ही चुनौतीपूर्ण और संघर्ष से भरा रहा है जीवन मेरा। मुझे वो सारे क्षण याद आ रहे हैं जब देश में गरीब पिछड़े शोषित और वंचित लोगों की लड़ाई लड़ना कितना कठिन था। वो ताकतें जो सैकड़ों साल से इन्हें शोषित करती चली आ रही थी वो कभी नहीं चाहते थे कि वंचित वर्ग के हिस्से का सूरज भी कभी जगमगाए। लेकिन पीड़ितों की पीड़ा और सामूहिक संघर्ष ने मुझे अद्भुत ताकत दी और इसी कारण से हमने सामंती सत्ता के हजारों साल के उत्पीड़न को शिकस्त दी.लेकिन इस सत्ता की जड़ें बहुत गहरी हैं और अभी भी अलग अलग संस्थाओं पर काबिज़ हैं. आज भी इन्हें अपने खिलाफ उठने वाला स्वर बर्दास्त नहीं होता और येनकेन प्रकारेण विरोध के स्वर को दबाने की चेष्टा की जाती है. आप तो समझ ही रहे होंगे कि छल, कपट, षड्यंत्र और साजिशों का ऐसा खेल खेला जाता है जिससे सामाजिक न्याय की धारा कमज़ोर हो और इस धारा का नेतृत्व करने वाले लोगों का मुंह बंद कर दिया जाए. इतिहास गवाह है कि मनुवादी सामंतवाद की शक्तियां कहाँ कहाँ और कैसे सक्रिय होकर न्याय के नाम पर अन्याय करती आई हैं. शुरू से ही इन शक्तियों को कभी हजम नहीं हुआ कि एक पिछड़े ग़रीब का बेटा दुनिया को रास्ता दिखाने वाले बिहार जैसे राज्य का मुख्यमंत्री बने। यही तो जननायक करपुरी ठाकुर के साथ हुआ था।’ – लालू प्रसाद यादव 

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