संविधान से नफरत – मंत्री हेगड़े

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संविधान माने .. सम विधान सबके लिए समान विधान माने समान कायदा … यह िन्हेंज मंजूर नहीं वोही लोग संविधान बदलनेकी बात करते है. यह ोज हेगड़े नामका मंत्री है .. यह ब्राह्मण है .. और इसे लगता है की सबको समान विधान .. समान कायदा होनेसे इसका और इसके समाजका नुकसान हो रहा है .. इसका यह वक्तव्य किसी ब्राह्मण परिषद् में आया .. गर इसका वक्तव्य इस देशके पिछड़े समाजके इसका यह वक्तव्य किसी ब्राह्मण परिषद् में आया .. गर इसका वक्तव्य इस देशके पिछड़े समाजके किसी परिषद् में आता तो इसका क्या हश्र होता इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है. ये वक्तव्य अगर वो चुनाव जितनेको करता तो भी इसे समझ आता डिपोजिट का पैसा कैसे जप्त होता. यह वक्तव्य बिजेपिका ब्राह्मण मंत्री ही क्यू करता ? प्रधानमंत्री क्यू नहीं ? क्योंकि ये मामला पक्षका या पार्टीका नहीं बल्कि जातिका है. जातीय मानसिकता से त्रस्त यह ब्राह्मण मंत्री सोचता है गर ये संविधान नहीं होता ; तो कोई तेली मेरा बॉस नहीं होता ; प्रधानमंत्री नहीं होता . आजभी इसका मनका ब्रह्मनोको विशेषाधिकार देनेवाले मनुस्मृति में रमता है .. भारतीय संविधान ने ब्राह्मण का विशेषाधिकार निकाल दिया और उसेभी सभी नागरिकोकी तरह बस एक भारतीय नागरिक यह दर्जा दिया. राजनितिक समता प्रस्थापित करनेके लिए एक नागरिक – एक मत का दर्जा प्रदान किया. और यहाँ ही उसकी बौखलाहट बाहर आती … हजारो सालसे स्वामीका दर्जा प्राप्त यह ब्राह्मण एक आम आदमी बन गया. मनुस्मृति ब्रह्मनोको विशेष दर्जा देते हुए कहती है किसीनेभी ब्रह्मनसे बहस नहीं करनी चाहिए .. ब्रह्मवाक्य प्रमाण मानना चाहिए , बहस नहीं करना चाहिए ; ब्रह्म्नोके शब्दोका विरोध माने अपशब्द ; मनुस्मृति कहती है :
शतं ब्रह्मनमारुय क्षत्रियो दंडमर्हती !
वैश्यों प्यर्धशातं द्वे वा शुद्रस्तु वधमर्हती !!
अर्थात ब्रह्मनको अपशब्द बोलनेपर क्षत्रिय को १०० पण दंड ; वैश्यको १५० या २०० पण दंड तो शुद्रको वध यही शिक्षा योग्य है . यहाभी आप देखेंगे वर्णों के तहत शिक्षा में भी भेदभाव किया गया है.  आज समान कायदे के तहत सभीको शिक्षाभी समान होती है .. यह काम भारतीय संविधान ने किया है. इसलिए इस ब्राह्मण महोदयको संविधान से नफरत है और ये महाशय संविधान बदलनेकी बात करते है. हम पिछड़े वर्ग के ८५ प्रतिशत करोडो भारतीय लोग आजभी संविधानकी पूरी इज्जत करते है ; तुम्हारा कला इतिहास भुलाकर ; आप अभी आदमी हो गये हो एइसे समझकर आपको मतदान करते है ; मगर आजभी आप अगर उसी काले इतिहास में रमते होगे ; उसके सपने देखते होगे ; तो ८५ प्रतिशत लोग आपने हमारे पुर्खोपर जो अन्याय ढाया यह याद करके और आजभी आप उसी मानसिकता में जे रहे हो एइसा मानकर अगर मतदान करे ; तो महाशय मंत्री तो भूल जाओ; आप किसी वार्ड से नगरसेवक तक चुनके आनेके काबिल न रहोगे. संविधान को माननेवाले ब्राह्मण भी हेगड़े जैसे ब्राह्मण को पूरी समझ दे और उसका निषेध करे. ओबीसी सेवासंघ एइसे व्यक्तियोंका निषेध करता है .

जय भारत जय संविधान

FB – Pradip Dhobley

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