बामसेफ

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बामसेफ ये अनुसूचित जाती / अनुसूचित जनजाती / ओबीसी एवं धर्मांतरित अल्पसंख्याक कर्माचारीयोन्की राष्ट्रीय संघटना है. किसी भी समाजके उत्थानकी जिम्मेदारी उस समाजके बुद्धीजीवी और बुद्धीवादी वर्गके लोगोन्की होती है ; और ये जिम्मेदारी भलीभाती समझनेवाले लोग इस संघटना का नियंत्रण एवं मार्गदर्शन करते है. हर वर्षके अंतिम साप्ताह मे चार दिन चालनेवला ये एक वैचारिक मेला होता है. इस मेले मे भारतके सभी राज्याके प्रतिनिधी सहभागी होते है. जम्मू और काश्मीर से भी प्रतिनिधी आये हुये थे. करीबन छे हजार प्रतीनिधीयोने अपने आपको रजिस्टर किया था. रीन्गनाबोडी स्थित २७ एकड जमीन मे फैली ये वास्तू डी के खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा निर्मित कि जा रही है. इस वर्ष दो कोटी खर्च कर राजर्श्री शाहू महाराज होस्टेल का उद्घाटन २५ डिसेम्बर को होणे जा रहा था. यह एक ऐतिहासिक कार्य था. मुझे लगा मैने इस ऐतिहासिक कार्यका प्रत्यक्षदर्शी होणा चाहिये; सो मै अधिवेशन पहुचा. इस वास्तुके निर्माण कार्यके लिये पचास साठ हजार रुपये मैने भी इकठ्ठा किये थे. महात्मा ज्योतिबा फुले जीके नामसे प्रशिक्षण केंद्र तीन साल पहले हि उद्घाटित हो चुका है. भारत मे संवैधानिक सामाजिक न्याय प्रस्थापित करनेका बडा काम ये वास्तू कर रहा है ; और भविष्य मे करेगा. हजारो सालसे सामाजिक अन्याय के सहते सामाजिक पिछ्डे बने वर्गके लोगोने इस भूमीवर जाकर वंदन करना चाहिये और इस वास्तुके निर्माण मे अपना आर्थिक योगदान देना चाहिये. अपने घरके इंटेरियर डेकोरेशन के लिये लाखो रुपये खर्च करनेवाले पिछ्डे वर्गके ; खास करके आरक्षण के लाभार्थी भी इस कार्यके लिये मात्र हजार रुपये देनेसे बचना चाहता है; तब हमे बडी शर्म महसूस होती है. समाज पिछडा है ; तो आपको आरक्षण मिला है ; आरक्षण मिला है ; तो आपको नोकरी मिली है; यह नोकरी हमारे समाजको उन करोडो लोगोंके वजहसे मिली है ; जो आज भी शहरोमे झुग्गी झोपडी योमे रह रहे है ; दो वाक्त्का खाना जिन्हे नसीब नही, पहनेको कपडे नही; खेतीसे उत्पन्न नही ; आत्महत्या जैसे इलाज है; हा इन्ही वजहसे आरक्षण है; आरक्षण लाभार्थी इस बारेमे जरूर सोचे और इस सामाजिक परिवर्तने भव्य वस्तुके लिये अपना योगदान दे. योगदान को comments मे दर्ज किजीये और इस पोस्त को ज्यादासा ज्यादा शेअर किजीये.
वहा काम करनेवाले श्रमिकोन्का पेयमेंट बकाया है ; वो हमारेही भाई है. लाख दो लाख घरके इंटेरियर पे खर्चा करनेवाले ; पाच छे लाखकी गाडीमे घुम्नेवले सोचे तो क्या हजार दो हजार रुपयेका योगदान नाही कर सकते? कर सकते है सिर्फ सोच सही होनी चाहिये. हमारे महा पुरुशोने तो हमारा जीवन सावार्नेके लिये अपना पुरा जीवन दिया ; क्या हम हजार दो हजार रुपये नाही दे सकते ? जरूर दे सकते . धनराशिकी रीसिप्त दि जायेंगी और आप आय टी बेनिफिट भी ले सकेंगे ..

प्रदीप ढोबले

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