ओबीसी समुदाय को बांटने की कोशिश

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नई दिल्ली: ओबीसी की सेंट्रल लिस्ट में कैसी और कितनी श्रेणियां और हों इसे तय करने के लिए बने आयोग के साथ ही इस मसले पर राजनीति भी तेज हो गई है. सोमवार शाम को राष्ट्रपति ने इस पर आयोग के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी और चौबीस घंटे के अंदर कांग्रेस ने इसे ओबीसी समुदाय को बांटने की कोशिश करार दिया. कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने एनडीटीवी से कहा कि सरकार ने राजनीतिक वजहों से ये फैसला किया है और ये ओबीसी समुदाय को बांटने की एक राजनीतिक पहल है. आयोग के गठन पर कैबिनेट ने इस दलील के साथ मुहर लगाई थी कि सरकार की मंशा आरक्षण का फायदा सारी ओबीसी जातियों को बराबर पहुंचाने की है. लेकिन ओबीसी समुदाय के नेता मानते हैं कि इससे पीछे कोशिश पिछड़े वर्ग राजनीति का नक्शा बदलने की भी है.
शरद यादव ने भी एनडीटीवी से कहा कि सरकार ऐसे फैसलों के ज़रिये समाज को बांटना चाहती है. सरकार ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर यानी मलाईदार तबके की सीमा छह लाख रुपये सालाना से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर चुकी है. खास बात ये है कि फैसला ऐसे वक्त पर लिया गया है जब साल के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं.
ओबीसी आरक्षण का मामला हमेशा से ही भारतीय राजनीति में एक बेहद ही संवेदनशील मामला रहा है. इस फैसले के जरिये सरकार की कोशिश ओबीसी राजनीति के समीकरण को बदलने की है. ये एक बेहद अहम राजनीतिक फैसला है, जिसका असर देश में ओबीसी राजनीति की दिशा और दशा पर पड़ेगा.

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