किसानों के प्रति राज्य सरकार की ‘बेरुखी

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अकोला: महाराष्ट्र में किसानों के एक आंदोलन का नेतृत्व करते वक्त हिरासत में लिए गए भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने विदर्भ क्षेत्र के किसानों की मांगें पूरी होने तक उस जगह को छोड़कर नहीं जाने का संकल्प लिया. पूर्व केंद्रीय मंत्री को सोमवार शाम विदर्भ के किसानों के प्रति राज्य सरकार की ‘बेरुखी’ के खिलाफ प्रदर्शन करते वक्त हिरासत में लिया गया था. उन्हें जिला पुलिस मुख्यालय ले जाया गया था और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया.

हालांकि 80 साल के इस नेता ने जगह छोड़कर जाने से इंकार किया और वह पुलिस मैदान में धरने पर बैठ गए. वहां उन्होंने रात गुजारी थी. उन्होंने कहा कि किसानों की सारी मांगें पूरी होने तक वह स्थल छोड़कर नही जाएंगे. सिन्हा ने संवाददाताओं से कहा,  जिला प्रशासन ने देर रात तक हमसे बात की थी, लेकिन उन्होंने हमारी मांगें नहीं मानी. हम किसानों की सभी मांगें पूरी होने तक यह जगह छोड़कर नहीं जाएंगे. पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याएं सुलझाने को लेकर गंभीर नहीं है.

उन्होंने कहा, मैं किसानों के प्रति प्रशासन और सरकार का रुख महसूस करता हूं जो गंभीर नहीं है. हम मजाक बनाने की चीज नहीं हैं. सिन्हा ने कहा कि उन्होंने किसानों से संबंधित मुद्दों के बारे में कई स्थानीय और राष्ट्रीय नेताओं से बात की. शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे के मीडिया सलाहकार हर्षल प्रधान ने कहा कि ठाकरे और सिन्हा ने फोन पर बात की और किसानों के मुद्देां पर चर्चा की. सिन्हा ने कहा कि किसानों की आधा दर्जन मांगों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कोई बात नहीं हुई है. खबरें हैं कि सिन्हा ने राकांपा प्रमुख एवं पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से टेलीफोन पर बात की. हालांकि जिला प्रशासन ने दावा किया कि किसानों की ज्यादातर मांगों को स्वीकार कर लिया गया है.अकोला के कलेक्टर आस्तिक पांडेय ने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने सात में से छह मांगें स्वीकार कर ली हैं और उन्होंने किसानों से प्रदर्शन खत्म करने का अनुरोध किया. 

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