राजस्थान में गुर्जरों के आरक्षण को रोका

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 नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान ओबीसी आरक्षण विधेयक मामले में अहम फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट से राजस्थान सरकार को राहत नहीं मिली है और उसने राजस्थान में गुर्जरों के आरक्षण को रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की याचिका का निस्तारण करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि राज्य सरकार आरक्षण के 50 फीसदी कोटे की तय सीमा को पार नहीं करेगी. हाई कोर्ट अब इस पूरे मामले की मेरिट (योग्यता ) के आधार पर सुनवाई करेगा.


दरअसल, गुर्जरों के आरक्षण आंदोलन के बाद राजस्थान सरकार की ओर से लाए गए ओबीसी आरक्षण विधेयक 2017 पर राजस्थान हाईकोर्ट ने बीते गुरुवार को रोक लगा दी थी. यह विधेयक राजस्थान विधानसभा में 25 अक्टूबर को पास किया गया था.

गंगासहाय शर्मा ने विधेयक की संवैधानिकता को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. अधिवक्ता जीपी कौशिक ने मामले में पैरवी की. बिल के जरिए ओबीसी आरक्षण को 21 से 26 फीसदी किया गया था. कुल आरक्षण भी अधिकत्तम सीमा को पार कर 54 फीसदी हो गया था. राज्य की वसुंधरा राजे सरकार की ओर से पास कराए गए इस बिल में गुर्जर समेत पांच जातियों को अलग से आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था. इस बिल के पास होने से पूर्व राजस्थान में ओबीसी कोटे में 21 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था थी.

द बैकवर्ड क्लासेज ( रिजर्वेशन ऑफ सीट्स इन एजुकेशनल इंस्टीटयूशन्स इन द स्टेट एंड ऑफ अपाईंटमेंट एंड पोस्टस इन सर्विसेज इन द स्टेट) बिल, 2017 के तहत गुर्जर, बंजारा, गडिया- लोहार, राइका और गडरिया समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण दिया गया. इसके तहत राजस्थान में आरक्षण का कोटा 54 फीसदी हो गया जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 फीसदी से ज्यादा है.

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